क्षिक्षा

बिटिया पढ़े तनावमुक्त इसलिए कराया सरकारी स्कूल में दाखिला

रायपुर। भद्र नागरिक सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों के दाखिले को लेकर नाक-भौं सिकोड़ते हैं लेकिन, उनकी इस धारणा को खारिज किया है आईपीएस डी रविशंकर ने। उन्होंने गुरुवार को अपनी लाडली दिव्यांजलि का शहर के शांतिनगर स्थित सरकारी स्कूल में कक्षा दो में दाखिला कराया। गुरुवार को रविशंकर की इस खूबसूरत पहल का स्कूल की शिक्षिकाओं ने स्वागत किया।

आम तौर पर सरकारी स्कूलों की छवि सही नहीं मानी जाती। यहां काला अक्षर भैंस बराबर माना जाता है। यही वजह है कि पठन-पाठन को लेकर अभिभावक यहां अपने बच्चों के दाखिले को राजी नहीं होते। अलबत्ता अंग्रेजी स्कूलों का रुख करते हैं। लेकिन यहां एसआईबी में तैनात आईपीएस डी रविशंकर ने इस धारणा को तोड़ दिया। उन्होंने अपनी बेटी दिव्यांजलि का शांतिनगर स्थित सरकारी स्कूल में दाखिला कराया। इस दौरान उनकी पत्नी डी ललिता भी स्कूल गई थीं।

डी रविशंकर ने कहा कि उन्हें छत्तीसगढ़ की आंचलिक बोली और हिंदी भाषा के प्रति अनुराग है। वैसे भी मेधा किसी भाषा विशेष की मोहताज नहीं होती। सरकारी स्कूलों से बड़ी प्रतिभाएं सामने आती रही हैं। डी रविशंकर का मानना है कि दिव्यांजलि अंग्रेजी के अलावा हिंदी में भी पारंगत होगी। अन्य बच्चों के साथ उनकी बेटी का तनावमुक्त मानसिक विकास होगा। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी स्कूलों में बस्तों का बोझ और कई ऐसी गतिविधियां हैं जो बाल मन के प्रतिकूल होती हैं। सरकारी स्कूलों में प्रतिभाओं को संवरने का पूरा मौका होता है। अभिभावकों को इसे समझना होगा।

बता दें कि इससे पहले बलरामपुर कलेक्टर अवनीश कुमार शरण ने भी अपनी बेटी और विधायक शिवशंकर साय ने अपने बेटे का सरकारी स्कूल में दाखिला करा कर मिसाल कायम की है। बहरहाल, जब पिछले कुछ वर्षों में सरकारी स्कूलों में पौने सात लाख बच्चों का प्रवेश घटा है तो ऐसे में डी रविशंकर की पहल का अफसरों ने भी इस्तकबाल किया है।

घर में इंग्लिश बोलती है
स्कूल तो हिन्दी माध्यम है, ऐसे में क्या करेंगे? इस सवाल पर डी रविशंकर ने कहा कि उनकी बेटी घर में इंग्लिश में ही बात करती है। लेकिन अब हिंदी भी सीखेगी। इससे पहले बच्ची गुरुकुल पब्लिक स्कूल कवर्धा (इंग्लिश माध्यम) में पढ़ रही थी। शांति नगर की प्रिंसिपल विद्या सक्सेना ने कहा कि पहली बार किसी आईपीएस का बच्चा इस सरकारी स्कूल में आया है। यह स्कूलों का वातावरण सुधरने का प्रतीक भी है। आशा है कि लोगों में इसका सकारात्मक संदेश जाएगा।

स्वागत करता हूं
एक आईपीएस ने हमारे स्कूलों पर अपना भरोसा जताया। इसके पहले भी आईएएस और जनप्रतिनिधि के बच्चों ने सरकारी स्कूल में दाखिला लिया है। सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की कमी थी, जिसे हम दूर कर रहे हैं। मैं व्यक्तिगत रूप से ऐसे अफसर स्वागत करता हूं, जिन्होंने सरकारी स्कूल का भरोसा बढ़ाया है।

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