छत्तीसगढ़ राज्य

निजी अस्पतालों को छोड़ सरकारी अस्पताल की ओर रुख करते है मरीज,बालोद कलेक्टर डॉ. मित्तर के मैनेजमेंट ने स्वास्थ्य व्यवस्था की बदल दी तस्वीर

@ रवि भूतड़ा
डाक्टर डे स्पेशल
बालोद।
जिस जिले के कलेक्टर स्वयं डॉक्टर हो तो उस जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था कैसे बदहाल हो सकती हैं। आज जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं एवं सुविधाओं को देख जिलेवासी अपना इलाज करवाने कतराते नही हैं। बल्कि निजी अस्पतालों के पहले मरीजों का रुख सरकारी अस्पतालों की ही ओर होता हैं। यह सब मुमकिन हुआ हैं, यहां के कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर की सोच एवं बेहतर मैनेजमेंट की वजह से। डॉ. मित्तर ने स्वास्थ्य विभाग की तस्वीर ही बदल कर रख दी हैं। इसके चलते स्वास्थ्य व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं। कलेक्टर डॉ. सारांश मित्तर पूर्व में स्वास्थ्य मिशन के संचालक रह चुके हैं। इसके चलते डॉ. मित्तर ने अपने बेहतर सोच और मैनेजमेंट से जिला स्वास्थ्य विभाग के अंदर चरमराई व्यवस्था को बदलाव लाते हुए बेहतर कर दिया हैं।
मातृ-शिशु अस्पताल जिले में बड़ी देन
जिला मुख्यालय में मातृ-शिशु अस्पताल एक सपने जैसे ही हैं। इसे सच कर दिखाया हैं कलेक्टर डॉ.सारांश मित्तर ने। गर्भवती महिला की डिलवरी से लेकर नवजात शिशु की देखभाल तक यहां मातृ शिशु अस्पताल में किया जाता हैं। खुशनुमा माहौल, बेहतर डॉक्टर-नर्स, नए आधुनिक उपक्रम के बीच नवजात शिशु की सेहत की देखभाल की जाती हैं। अगर किसी नवजात शिशु का वजन डेढ़ किलो का हो तो यहां रहकर ढाई किलो का हो जाता हैं। जिला मुख्यालय में मातु शिशु अस्पताल खुलने के बाद गर्भवती महिलाओं की बेहतर डिलीवरी के साथ-साथ उनकी देखभाल तक बराबर की जाती हैं।
कलेक्टर साफ-सफाई को देते हैं महत्त्व
बेहतर स्वास्थ्य के लिए अपने आसपास साफ सफाई होनी चाहिए। इससे हमारा शरीर भी स्वस्थ्य रहता हैं। यह मानना डॉ. मित्तर का हैं। तभी तो जिले के गांव के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी आज बेहतर हो चुके हैं। जिला अस्पताल में घंटे दर घंटे सफाई होती रहती हैं।

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