छत्तीसगढ़

जिले में कमेटी बने गुजर चुके हैं 3 साल, आज तक नहीं मिला थर्ड जेंडर को योजनाओं का लाभ और ना ही मान-सम्मान

थर्ड जेंडर की परेशानी सुनने वाला कोई नही-

रवि भूतड़ा

बालोद. जिले में थर्ड जेंडर की समस्या सुनने वाला कोई नजर नहीं आ रहा है। आज भी जिले में इन लोगों को मान-सम्मान नहीं मिल पा रहा है। वे आज भी अपने हक के लिए लड़ रहे हैं। जानकारी अनुसार प्रदेश में थर्ड जेंडर के सम्मान व उन्हें शासन की योजनाओं का लाभ दिलाने व विकास के लिए कमेटी बने तीन साल हो गए, पर अब तक जिले में इनकी एक बैठक नहीं हो पाई है और ना ही शासन-प्रशासन ने कभी इनकी सुध ली।

योजनाओं के लिए मुद्दों पर चर्चा की जाएगी-
बीते दिनों मेंबर ऑफ थर्ड जेंडर वेलफेयर बोर्ड छत्तीसगढ़ शासन के सदस्य कंचन सेन्द्रे ने बालोद जिले के आधा दर्जन थर्ड जेंडर्स के साथ मिलकर कलेक्टर से मिलने आए थे। पर कलेक्टर कक्ष के पास के कर्मचारी ने तो उन्हें कलेक्टर से मिलने ही नहीं दिया। फिर सभी समाज कल्याण विभाग के उप संचालक नरेंद्र देवांगन से मिले और अपनी बात रखी। जिसके बाद उप संचालक ने कहा 13 जुलाई को थर्ड जेंडरर्स की बैठक रखी जाएगी। जहां उनके सम्मान के लिए शासन के निर्देश अनुसार योजनाओं के लिए मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

बालोद जिले में हैं पंजीकृत 195 थर्ड जेंडर-
सदस्य कंचन सेन्द्रे ने जानकारी दी कि बालोद जिले में अब तक 195 थर्ड जेंडर्स की पहचान हो चुकी है, पर अभी और कई सामने नहीं आए हैं। उन्होंने बताया कि थर्ड जेंडर समाज के लोग कितने परेशान और कितने मुसीबत झेल रहे हैं यह वही जानते हैं। पर किसी को इसका अंदाजा नहीं है। बालोद जिले में तो कमेटी बने तीन साल हो गए हैं। पर इनकी समस्या सुलझाने व इनकी परेशानियां पूछने वाला ही नहीं है।

पहली बार 13 जुलाई को मामले पर होगी बैठक-
जानकारी में मेंबर आफ थर्ड जेंडर वेलफेयर बोर्ड के सदस्य कंचन सेन्द्रे ने कहा कि यहां के अपर कलक्टर और समाज कल्याण विभाग के उपसंचालक से चर्चा हुई है। मामले में उन्होंने कहा है कि शासन के आदेशानुसार ही इस ओर पहल की जाएगी। जल्द ही 13 जुलाई को थर्ड जेंडर्स की बैठक कमेटी द्वारा ली जाएगी। बैठक में बोर्ड से भी दो लोग आएंगे और थर्ड जेंडर की समस्याओं पर विचार रखेंगे। इस दौरान जिले के और भी थर्ड जेंडर के लोग मौजूद थे।

छिंटाकशी से रहते हैं परेशान-
ज्ञात रहे कि जिले में थर्ड जेंडरों की स्थिति अच्छी नहीं है। आज भी उन्हें शासन की योजनाओं के लाभ कि लिए दर-दर भटकना पड़ रहा है। लोगों की छिंटाकशी से वे सार्वजनिक स्थानों पर जाने से बचते हैं। इसी तरह और भी अनेक परेशानियां है जिसका समाधान नहीं निकल पा रहा है।

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