छत्तीसगढ़

पत्नी और बच्ची के रहते शिक्षक ने छात्रा से शपथ पत्र बनवाकर की शादी, 2 साल बीतने के बाद अब प्रेमिका ने लगाया दैहिक शोषण का आरोप

प्रेमी शिक्षक और प्रेमिका छात्रा ने 100 रूपये का शपथ पत्र बनवाकर  एक दूसरे को पति-पत्नी के रूप में स्वीकारा

रवि भूतड़ा
बालोद. कहते हैं  कि प्यार की कोई सीमा नहीं होती, कई मर्यादाओं एवं बंधनों को तोड़कर भी लोग प्यार करते हैं, ऐसा ही कुछ मामला बालोद जिले में सामने आया हैं, जहां शिक्षक पति ने अपनी पत्नी और तीन वर्षीया बच्ची के रहते एक लड़की से प्रेम प्रसंग बनाया और अपने प्रेम संबंधों को मुक्कमल जहान देने के लिए 100 रूपये के नोटरी पेपर में एक दूसरे को पति-पत्नी स्वीकार कर  जीने-मरने की कसमें खाई और अब ढाई साल साथ रहने के बाद प्रेमिका ने अपनी प्रेमी पर मारपीट, धोखा देकर विवाह करना तथा शारीरिक शोषण का आरोप लगाते हुए एसपी, महिला सेल एवं शिक्षा विभाग में इसकी शिकायत कर दी हैं.

मिली जानकारी के अनुसार नगर के पाररास वार्ड-20 निवासी डोमेन्द्र सिंह पिता रामनारायण साहू (29वर्ष) जो की पेशे से शिक्षक हैं और ग्राम मुल्ले के प्राथमिक शाला में विगत 8 सालों से  पदस्थ हैं, 2014 में डोमेन्द्र सिंह ग्राम पेवरों में निवास किया करते थे, तब गुरुर विकासखंड के ग्राम पेवरों निवासी  छात्रा तरुण (21वर्ष) पिता उत्तम कुमार ट्यूशन पढऩे डोमेन्द्र सिंह के पास आती थी. शिक्षक डोमेन्द्र सिंह छात्रा तरुण की ओर आकर्षित होने लगा और छात्रा को प्रपोज कर दिया. तरुण ने भी डोमेन्द्र के प्यार को कबूल किया और दोनों का प्रेम-प्रसंग चलता रहा. प्रेम इतना गहरा हो गया की तरुण डोमेन्द्र को शादी के लिए कहने लगी क्योंकि डोमेन्द्र पहले से ही शादी शुदा था तो उसने तरुण से शादी नहीं करने की बात कही. जिसके बाद तरुण के लगातार दबाव और कुछ कर लेने की बात सुन 16 फरवरी 2016 को दोनों ने शपथ पत्र भर नोटरी के सामने साथ जीने-मरने की कसमें खा एक दूसरे को पति-पत्नी स्वीकार कर लिया. सौ रूपये के  नोटरी पेपर  में ही दोनों ने शादी कर ली, लेकिन शपथ पत्र में डोमेन्द्र सिंह ने अपनी पहली पत्नी और अपनी तीन वर्षीया बेटी का उल्लेख नहीं किया था.

डोमेन्द्र सिंह

एक माह तक रहे दोनों बाहर-
16 फरवरी 2016 को सौ रूपये के  नोटरी में दोनों एक दूसरे को पति-पत्नी स्वीकार करने के बाद 20 फरवरी को दोनों रायगढ़ चले गए, कुछ दिनों तक तरुण के घर नहीं आने पर परिजनों ने गुरुर थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करवाई. एक माह बीत जाने के बाद डोमेन्द्र और तरुण  वापस बालोद आ गए. वापस आकर तरुण ने थाने जाकर अपनी रजामंदी से लड़के के साथ जाना व नोटरी में शादी कर लेने की बात कही. जिसके बाद डोमेन्द्र तरुण को अपने साथ लेकर बालोद आ गया और नगर के ही शिकारीपारा में एक किराए का मकान लेकर तरूण के रहने की व्यवस्था की दी और उसका सारा खर्च उठाने लगा.

पत्नी को जब चला पता तो गई मायके-
उक्त सारे घटना की जानकारी जब डोमेन्द्र की पत्नी शारदा साहू को हुई तो अपने पति के इस कृत्य से परेशान होकर मायके जाकर रहने लगी, तो कुछ हफ्तों बाद डोमेन्द्र द्वारा अपनी पत्नी को समझाबुझा के माफी मांग वापस अपने घर लाया गया. बता दे की डोमेन्द्र सिंह की शादी 2011 में ही चुकी थी. डोमेन्द्र और शारदा की 3 वर्षीया एक बेटी भी हैं.

तरुण

तलाक देने की बात पर हुआ वाद-विवाद-
मार्च 2018 के बाद तरुण लगातार डोमेन्द्र पर उसकी पत्नी शारदा को तलाक देने का दबाव बनाती रही. पर डोमेन्द्र उसकी बात को अस्वीकार कर दी. इस बात से खफा होकर तरुण 20 अप्रैल 2018 को अपने मामा के यहाँ चली गई और उसके कुछ दिनों बाद तरुण ने महिला सेल, एसपी, थाना बालोद एवं शिक्षा विभाग में डोमेन्द्र के खिलाफ मारपीट, धोखा देकर शादी करना एवं शारीरिक शोषण का आरोप लगा शिकायत कर दी है जिसकी जांच की जा रही है.

बीईओ ने दिया दोषी करार और कार्यवाही के लिखा सीईओ को-
प्रेमिका तरुण की शिकायत के बाद बीईओ बसंत बाघ ने इसकी जाँच की, जाँच करने के बाद शिक्षक डोमेन्द्र को एक पत्नी होने के बावजूद दूसरी पत्नी रखने का दोषी बतलाते हुए अधिनियम 1965/22ए के तहत आगे की कार्यवाही के लिए बालोद जनपद सीईओ को पत्र लिखा है. चूंकि यह पूरा मामला निजी हैं, और तरूण ने महिला सेल, थाना एवं एसपी को भी इसकी शिकायत की है तो सबसे पहले सवाल यह उठता हैं कि क्या बीईओ को निजी व्यक्तिगत मामले में दोषी करार दे कार्यवाही करने का अधिकार है.

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