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कसडोल में ओडीएफ के दावों की खुली पोल, शौचालय निर्माण में भारी अनियमितता, सरपंच और सचिव पर लग रहे भ्रष्टाचार के आरोप

गुनीराम साहू कसडोल

कसडोल. प्रदेश भर में जिस तरह समय से पूर्व कई जिलों को ओडीएफ घोषित कर आधिकारी सरकार से वाहवाही लूटने में जुटे हैं, इसकी हकीकत अब परत दर परत खुल रही है. इसकी एक बानगी कसडोल विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम नवागांव की आश्रित ग्राम तालदादर में दिखाई दे रही है. यहाँ के ग्रामीण सरपंच-सचिव के द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के कारण अपने अधिकारों के लिये लड़ाई लड़ रहे है. यहाँ दर्जनों ग्रामीणों के घर में सरपंच के द्वारा खुद आधी-अधूरी गुएावत्ताविहीन शौचालय का निर्माण कराया गया है, जिसके कारण ग्रामीणों को खासी परेशानी झेलनी पड़ रही है.

ग्रामीणों का आरोप है कि जब राशन कार्ड, पेंशन, शौचालय सहित कई महत्वपूर्ण काम के लिए जब पंचायत भवन जाते है तब पंचायत भवन में न ही सरपंच नजर आते हैं और न ही सचिव के दर्शन होते हंै. जबकि नियमानुसार सरपंच और सचिव को गांव की समस्या का निदान के लिए प्रतिदिन पंचायत भवन में बैठना चाहिए. पर नियमों को ताक में रखकर सरपंच और सचिव अपने कायदे और कानून बना लिए हैं.

कागजो में शौचालय
गांव के कई लोगों के घरों में कागजों पर शौचालय निर्माण हो गया पर हकीकत उससे कोसों दूर है. हालत यह है कि ग्रामीण अपने अधिकारों को नहीं जानते इसलिए सरपंच से सवाल करने से भी कतराते हैं. जिसका सीधा फायदा उन्हें मिल जाता है. पर कई ग्रामीण ऐसे हैं जिन्होंने सरपंच के इस भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठायी है जिसमें लाल साय गोंड, संजय परगनिया, पदमुनि ठाकुर, बाबूलाल शीदार और उषा श्रीवास के नाम प्रमुख है. इन लोगों ने मीडिया के सामने आकर कहा है कि उनके यहां सरपंच द्वारा शौचालय आधा-अधूरा निर्माण कराया गया है. जिस पर छत और सेफ़्टी की टंकी सहित सीट भी नही लगी है जिससे कारण आज भी उनका शौचालय अधूरा पढ़ा हुआ है और उन्हें मजबूरन खुले में शौच जाना पढ़ रहा है.

जाँच हुई तो खुलेंगे राज
बीते 3 वर्षों में पंचायत द्वारा जितने भी शौचालय हितग्राहियों के यहां बनाये गए है उनमें कुछ शौचालय तो आधे-अधूरे तो कुछ स्टीमेट के विपरीत बनाया गया है. यहां हितग्राहियों ने बताया कि उनके घर जो शौचालय बनाया गया है उसकी लंबाई चौड़ाई भी छोटी है जिससे काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. यहां भी अन्य ग्राम पंचायत की तर्ज पर बड़े पैमाने में भ्रष्टाचार को अंजाम दिया गया है जबकि यहाँ के ग्रामीणों ने कई बार इसकी शिकायत जिले के अधिकारियों से की लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई. ग्रामीणों ने बताया कि उनके द्वारा कई बार शौचालय के लिए सरपंच को मौखिक सहित लिखित आवेदन भी दिया लेकिन सरपंच ने उनके आवेदनों को कोई तवज्जों नहीं दी, मजबूरन वह खुले में शौच जा रहे हैं. सम्पूर्ण ग्राम में शौच मुक्त होने का दावा कर गांव को ओडीएफ का तमगा तो पहना दिया गया लेकिन हकीकत कुछ और ही बयां करती है.

इनका कहना है-
मेरे द्वारा सभी शौचालय सही बनाये गए हैं मैं आपको और जानकारी नहीं दे सकता।
बिहारी लाल चौहान
सरपंच, ग्राम पंचायत नवागांव

सभी से प्रेम व्यवहार है आपसे भी बना लेंगे।
उदय राम बरिया
सचिव

आपके द्वारा जानकारी प्राप्त हुई है शौचालय का मामला गंभीर है मैं टीम भेजकर दिखवाता हूँ और अगर लापरवाही पायी गयी तो उचित कार्यवाही की जाएगी।
एम. चंद्रशेखर
मुख्य कार्यपालन अधिकारी
जनपद पंचायत, कसडोल

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