छत्तीसगढ़

2500 कैदी, सिर्फ 15 को ही मिल सकती है रिहाई

2500 कैदी, सिर्फ 15 को ही मिल सकती है रिहाई
2500 कैदी, सिर्फ 15 को ही मिल सकती है रिहाई

बिलासपुर।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने छोटे व प्रतिबंधात्मक मामलों में जेल में आधे से अधिक की सजा काट चुके व उम्रदराज कैदियों की रिहाई का निर्णय लिया है। इसके बाद से केंद्र सरकार ने सभी राज्य सरकारों को कुछ शर्तों के साथ ऐसे कैदियों की जानकारी तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
केंद्रीय जेल बिलासपुर में बंद करीब दो हजार पांच सौ कैदियों में महज 15 कैदी ही रिहाई के दायरे में आए हैं, जिनकी फाइलें राज्य सरकार को भेजी गई हैं। निर्णय के मुताबिक 55 साल से अधिक उर्म्र की महिला बंदी जिन्होंने 50 फीसदी सजा पूरी कर ली है, 60 साल से अधिक आयु के बंदी जो 50 फीसदी सजा काट चुके हैं और ऐसे पुरुष बंदी जो पूरी सजा का दो तिहाई हिस्सा जेल में बिता चुके हैं। इसके साथ ही उम्रदराज दिव्यांग बंदियों के संबंध में भी जानकारी मांगी गई है।
इस तरह के छोटे मामलों में बंद कैदियों को सजा माफी की श्रेणी में रखते हुए उन्हें चरणबद्घ तरीके से रिहा करने की तैयारी है। लेकिन, इसमें दुष्कर्म, भ्रष्टाचार, आतंकवाद, एनडीपीएस, विदेशी मुद्रा अधिनियम, हत्या, डकैती-हत्या, दहेज-हत्या जैसे गंभीर मामलों के सजायाफ्ता बंदियों को शामिल नहीं किया गया है। इसी के चलते केंद्रीय जेल बिलासपुर के अधिकांश कैदी इस दायरे में नहीं आ रहे हैं।
पर्व विशेष पर हो गई है बंद
जेल अधीक्षक एसएस तिग्गा ने बताया कि वर्ष 2015 से पहले पर्व विशेष पर जेल मेनुअल व कैदियों के आचरण को देखा जाता था। इसी के तहत शासन के आदेश पर सजा में छूट के प्रावधान का लाभ देकर कैदियों की रिहाई की जाती थी। लेकिन, तमिलनाडु सरकार द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारे श्रीहरण उर्फ मुरुगन को रिहा करने के आदेश पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी थी।
साथ ही कोर्ट ने केंद्र के साथ ही राज्य सरकारों को आदेश जारी कर हत्या समेत अन्य गंभीर मामलों के आरोपितों की सीधी रिहाई पर रोक लगाते हुए गाइड लाइन जारी की थी। इसके तहत सजा सुनाने वाली अदालत के अभिमत व राज्य शासन की कमेटी के निर्णय के बाद ही रिहाई के आदेश दिए गए।
इसके बाद से संबंधित कोर्ट से अभिमत लेने के बाद ही कमेटी को प्रस्ताव भेजा जाता है। जेल अधीक्षक ने बताया कि वर्ष 2015 के बाद कमेटी के निर्णय पर केंद्रीय जेल से करीब दो दर्जन कैदी रिहा किए गए हैं।
थर्ड जेंडर या 70 फीसद दिव्यांग बंदी नहीं
केंद्रीय जेल बिलासपुर में थर्ड जेंडर बदी तो हैं। लेकिन, कैबिनेट के निर्णय के तहत दी गई शर्तों में वे शामिल नहीं हो सके हैं। इसके चलते उनकी रिहाई का प्रस्ताव नहीं बना है। इसी तरह यहां जेल में 70 फीसदी एक भी दिव्यांग बंदी नहीं है।
केंद्रीय जेल में पुरुष कैदियों की क्षमता — 1,100
केंद्रीय जेल में परिरुद्घ पुरुष बंदी — 3,219
केंद्रीय जेल में सजायाफ्ता बंदी — 2,455
केंद्रीय जेल में महिला बंदियों की क्षमता — 100
केंद्रीय जेल में परिरुद्घ महिला बंदी — 206
केंद्रीय जेल में सजायाफ्ता महिला बंदी –145
-छोटे मामलों में रिहाई के लिए दिशा-निर्देश जारी
– छोटे मामलों में रिहाई के लिए दिशा-निर्देश जारी कर शासन स्तर पर जानकारी मंगाई गई है। इसके तहत केंद्रीय जेल से 15 कैदियों का प्रस्ताव तैयार कर मुख्यालय को भेजा गया है। इस पर निर्णय शासन स्तर पर ही लिया जाएगा। अभी तक रिहाई को लेकर कोई आदेश नहीं मिला है। – एसएस तिग्गा, अधीक्षक, केंद्रीय जेल बिलासपुर

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