छत्तीसगढ़

विद्यालय को अपना घर एवं विद्यार्थी को अपने पुत्र की तरह !

विद्यालय को अपना घर एवं विद्यार्थी को अपने पुत्र की तरह !
विद्यालय को अपना घर एवं विद्यार्थी को अपने पुत्र की तरह !

जैजैपुर
जहां पर सूर्य का प्रकाश नहीं पहुंचता है वहां पर पत्रकार पहुंचता है इस तरह से यह हमारे पत्रकार के नजरों में प्राथमिक शाला गिरारी स्कूल देखने को मिला जो पेण्ड्रा डाइट से लगभग 6 -7 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जहां पर शिक्षक विद्यालय को अपना घर समझते हैं और विद्यार्थी को अपना पुत्र समझते हैं।
देखने वाली बात यह आया है कि पेंड्रा से मजहब 6 किलोमीटर की दूरी पर शासकीय प्राथमिक शाला गिरारी में 3 शिक्षक के सहारे स्कूल का संचालन हो रहा है, जो 3 शिक्षक हैं मेडम शर्मा, रिटायरमेंट सैनिक राठोर एवम प्रधान पाठक वह विद्यालय को अपना घर एवं विद्यार्थी को अपने पुत्र की तरह मानते हैं जहां पर भौतिक संसाधनों का अभाव होने के उपरांत भी कक्षा पहली से लेकर पांचवी तक के छात्र 15 – 20 – 25 तक का पहाड़ा कंठस्थ उन्हें याद है वहीं पर जो अंग्रेजी है उसे भी वे फर्राटे के साथ पढ़ लेते हैं ,जहां पर हमारी मातृभाषा हिंदी है हिंदी को धारा प्रवाह के तौर पर कसिव राइटिंग के तहत भी प्रयोग में वह ला रहे हैं ।
इस तरह से बच्चों और छात्रों में गजब का तालमेल देखा गया ,कि वहां के छात्र जब भी शिक्षक गली या किसी चीज से पार होते हैं तब वह खड़े होकर उन्हें प्रणाम करते हैं, और शिक्षक भी उन्हें खड़े होकर उनका अभिवादन को स्वीकार करते हैं , और आशीर्वाद को देते हैं ।
उनसे सभी जानकारी लेते हैं कि क्या आपको कठिनाई है इस तरह से वहां गिरारी प्राथमिक शाला में एस एम सी सक्रिय है जहां पर तीन पीढ़ी के लोग खो कबड्डी खेलते हुए नजर आते हैं। साथ में शिक्षक भी 3 पीढ़ी के लोगो के साथ खो और कबड्डी खेलते हैं । लेकिन बता दें कि विकासखंड पेंड्रा जिला बिलासपुर जो कि बी ईं ओ, बीआर सी , ए बी ओ, सी ए सी को चाहिए कि बिना संसाधन वाले शासकीय विद्यालय में भौतिक संसाधनों का अभाव है उन्हें पूर्ण करें और उन्हें अपने तौर पर सही राह दिखाते हुए विद्यालय को अग्रसर ले जाएं लेकिन बड़ी मजे की बात यह आती है कि जहां पर सूर्य की प्रकाश नहीं पहुचता वहां पर पत्रकार पहुंच जाते हैं । जो कि हमारे प्रतिनिधि ने कर दिखया लेकिन यह गिरारी स्कूल जिसमें तीसरी, चौथी ,पांचवी के छात्र को कंठस्थ पहाड़ा याद है.
फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते हैं वहीं पर हिंदी विषय का जो धारा प्रवाह है उसे जो पेंड्रा के कल्याणिका कान्वेंट के छात्र को भी पीछे छोड़ देंगे । कल्याणिका कानवेंट जो स्कूल है वहां भर्ती के लिए हजारों रुपए का फीस है लेकिन जो शासकीय प्राथमिक शाला गिरारी है वहां पर के छात्र जो दाल भात खाकर इतना शिक्षा अपने शिक्षक के प्रति रुचि रखते हुए ग्रहण कर लिए हैं इस विद्यालय को नकारा नहीं जा सकता।
इस विद्यालय को जिलाधिकारी या राज्यपाल अपना प्रतिवेदन से राष्ट्रपति से सम्मानित करेंगे वह भी कमी महसूस होगा क्योंकि यहां पर 3 शिक्षक के बदौलत फर्राटे के साथ में पहाड़ा पढ़ना , अंग्रेजी पढ़ना और हिंदी धाराप्रवाह का अजीबो लेख है वहीं पर इन लोगों के राइटिंग भी अच्छी है और सभी के सभी अच्छे किस्म के बोल लेते हैं.
बिना संसाधन का शासकीय प्राथमिक शाला स्कूल आज हमारे लोगों को इस तरह की स्कूल को आगे बढ़ाने में सहायता करना चाहिए विद्यालय को राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित करना चाहिए , ताकी हमारे अन्य शासकीय स्कूल के विद्यार्थी एवं शिक्षक में यह जागरूकता आ सके कि हमें अपने विद्यालय को कैसा बनाकर रखना चाहिए और उनके माता-पिता के साथ में भी कैसा व्यवहार करना चाहिए यदि शिक्षक और पालक में सामंजस्य बना रहेगा तो छात्र भी उसी तरह से अनुसरण करेंगे। बिना सिफारिश वाले विद्यालय को सम्मान दिलाना चाहिए यही हमारा नैतिकता बनती है ताकि शासकीय विद्यालय का मान बढ़ सके।

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